जनरल डब्बा

जो होता आ रहा है इसके मुसाफिरों के साथ (सौरभ के.स्वतंत्र)

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तो बिहार में साठ लाख बच्चे सड़क पर उतरेंगे!

Posted On: 19 Oct, 2011 में

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शिक्षा के क्षेत्र में पैदल रहा बिहार अब तक तक़रीबन पचास से साठ हज़ार निजी विद्यालयों पर आश्रित है. आई.ए.एस. और आई.पी.एस. के उत्पादक बिहार में लगभग साठ  लाख बच्चे अपना पठन-पाठन   निजी विद्यालयों से करते आ रहे हैं. तब जाकर पैदल बिहार की कमर कुछ हद तक सुरक्षित है. देश में आर.टी.ई. के लागू होने के बाद बिहार का मानव संसाधन विभाग जिस तरीके से निजी विद्यालयों की स्वायत्तता  पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही उस लिहाज से बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता का और बंटाधार होने जा रहा है इसमें कोई शक नहीं. पच्चीस प्रतिशत गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा  देना तो आर.टी.ई. का अच्छा प्रावधान है पर निजी विद्यालयों के प्रबंधन समिति में बाहरी घुसपैठ बरास्ता सरकार निहायत चिंतनीय है. निजी विद्यालय कालांतर  में आपसी प्रतिस्पर्धा से शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने  का प्रयास करते दीखते रहें. अब जब सरकार विद्यालय प्रबंधन समिति में कुछ गवई और सरकारी लोगों को लाने के लिए विद्यालयों को प्रस्वीकृति कराने  का दबाव डाल रही है तो इन साठ हज़ार विद्यालयों का भविष्य सरकारी विद्यालयों से भी ज्यादा अंधकारमय दिख रहा है. इस लिहाज से  निजी विद्यालयों के लगभग साठ हज़ार संचालको  , पचास से साठ लाख बच्चों तथा  उनके  अभिभावकों  का सड़क पर उतरना स्वाभाविक है..!

 - सौरभ के.स्वतंत्र

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lahar के द्वारा
October 28, 2011

सही मुद्दा – सही सोच ये समस्या बिहार की नहीं अन्य प्रान्तों की भी है | सिक्षा एक व्यवसाय की तरह हो गया है जो निजी हाथो की कठपुतली है |

    saurabh k.swatantra के द्वारा
    October 28, 2011

    शायद आपने इस लेख को समझा नहीं!

Ravi Ranjan के द्वारा
October 24, 2011

Wah aankhe khul gayin.Sadhuwad!

shaktisingh के द्वारा
October 20, 2011

बेहतर मुद्दा उठाया है आपने


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