जनरल डब्बा

जो होता आ रहा है इसके मुसाफिरों के साथ (सौरभ के.स्वतंत्र)

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इ दिवारी बड़ी रोअतनी हो!

Posted On: 22 Oct, 2011 Others में

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पिछले  दिवारी में छुट्टी मिलल रहे ,

दिहाड़ी जुटल रहे ,

काजाने दिवारी फेर ना आई

ऐसन लागत रहे ,

टिकस ना रहे

त का,

ट्रेन में घूस दिआईल ,

टीटी त बटले रहल ,

इ दिवारी गावे घूमिये आवे के बा

सोचले रहनी,

माई कहले रहे  कि

रास्ता में मत खइए

कोनो के दिहल,

मत सुतिये

समनवा के नियर,

सोचले रहनी  कि

घरे दिया जरुर जलाएम,

पठाखा जरुर छोडेम

गाँव के यारन के साथ,

पर किस्मत में लिखल रहे कुछु और,

रस्ते में साल भर के कमाई

औरी कपडा-लत्ता के हो गइल लूट,

दिवारी-दिवारी मनवा में बडबडात रहनी,

बेहोस रहनी हो दादा ,

ट्रेनवा गईल छूट,

मनवा मसोस के

माई के बात सोच के

इ दिवारी बड़ी रोअतनी हो,

इ बारी छुट्टी नइखे देले मालिक हमार!

- सौरभ के.स्वतंत्र

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
November 14, 2012

प्रिय सौरभ जी”,ई दिवारी बड़ी रोअतनी हों ”में मनवा का दर्द साफ़ दिखत हो … सुन्दर रचना… सुषमा गुप्ता

Lahar के द्वारा
October 25, 2011

सौरभ भैया नमस्कार चल केहू त हिम्मत कर के भोजपुरी में पोस्ट कइल | दिल खुश हो गइल पहिली बार भोजपुरी में पढ़त बानी | बहुत बहुत बधाई हो तोहरा के भोजपुरी के ये मंच पर लावे खातिर | http://lahar.jagranjunction.com/2011/10/24/%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 25, 2011

बढ़िया बा सौरभ जी।  http://kashiwasi.jagranjunction.com


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