जनरल डब्बा

जो होता आ रहा है इसके मुसाफिरों के साथ (सौरभ के.स्वतंत्र)

50 Posts

80 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4168 postid : 112

एक कतरा प्यार...

Posted On: 15 Nov, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तुम नित निहारती हो,
धूप और छाव के बीच पलके बिछाती हो,
साईकिल की घंटी बजाता पास वाला हलवाई
तुम्हे देखता है कि तुम्हारी नजरे किधर गडी हैं,
पर तुम लीन हो
अपने उस बेइंतहा प्यार को जताने के लिए,
मसलन एकटक निहारना,
माँ की चौका घर से आवाज़ पर भी
तुम निहारती ही रहती हो,
जैसे बार्डर पर एक सैनिक निहारता है
सीमा के उस पार से आने वाले पंक्षियों को,
पर वह मानता है अपने अफसरान का हुक्म,
पर तुम तो अभी भी निहार रही हो,
कुछ क्षणों के लिए
माँ की चिल्लाने को नजरंदाज करके,
जैसे कि मौके की तलाश है
न जाने कितने दिनों से,
आज तो वह देखे इस तरफ,
फिर देखती है तुम्हे तुम्हारी छोटी बहन
और नजरंदाज कर जाती है
तुम्हारे निहारने को,
आज मौसम सुहाना है
तुम फिर उम्मीद लिए चढ़ती हो रोज की तरह
आज भी छत पर
विडंबना यह कि वह भी है अपने छत पर
पर न जाने क्यों नही देखता है वो,
क्यों नही देखता है वो वह बेपनाह प्यार
जो उसकी सांसों में हैं
फिर पुनः बैरंग उतर आती हो तुम
हर रोज कोई न कोई तुम्हे देखता
और तुम्हारी चर्चाए करता है
चौराहे-नुक्कड़ पर,
तुम्हे चरित्रहीन कहा जाने लगता है,
तुम्हारा दोष इतना कि
तुम अपने पहले प्यार का
इज़हार करना चाहती हो
घर की देहरी लांघे
बिना ही जीना चाहती हो
अपना एक कतरा जीवन…
एक कतरा प्यार..

- सौरभ के.स्वतंत्र

www.hamarivani.comFollow me on Blogprahariरफ़्तार IndiBlogger - The Largest Indian Blogger Community


//
//
hit counter

| NEXT



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
November 17, 2011

सौरभ जी बहुत ही सुन्दर रचना………………… एक अलग तरह की, अलग ढंग की ………… ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Tamanna के द्वारा
November 17, 2011

तुम्हे चरित्रहीन कहा जाने लगता है, तुम्हारा दोष इतना कि तुम अपने पहले प्यार का इज़हार करना चाहती हो……बहुत सुंदर प्रयास…… http://tamanna.jagranjunction.com/2011/11/05/fake-secularism-in-india-condition-of-hindus-in-muslim-countries/


topic of the week



latest from jagran