जनरल डब्बा

जो होता आ रहा है इसके मुसाफिरों के साथ (सौरभ के.स्वतंत्र)

50 Posts

80 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4168 postid : 143

बेबसी

Posted On: 8 Mar, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सोचता हूँ
आसमान की तरह
खामोश रहू,
चुप-चाप बस जमी को निहारू
और तारीफ़ में तारो को
टिम-टिमा दू
बेबसी यही है कि
मै अथाह तो हूँ,
मै करीब तो दिखता हूँ,
पर हूँ दूर,
गोया
जुरर्त ये करता हूँ
कि एक मुट्ठी चांदनी में
जरुर भेजता हूँ सन्देशा,
जताना चाहता हूँ
मै ही हूँ
आसमान,
तारो वाला आसमान.

- सौरभ के.स्वतंत्र

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
March 8, 2012

भाव पूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति…..निश्चित ही सराहनीय….. कृपया इसे पढ़कर अपने विचारों से अवगत करायें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/03/04/क्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 8, 2012

छोटी किन्तु सम्पूर्ण रचना……………बहोत सुन्दर प्रश्तुती


topic of the week



latest from jagran